Thursday, 1 December 2011

बस की परेशानी


पहाड़गंज में रहने वाले गुरनाम सिंह डीटीसी की लो-फ्लोर बस सर्विस शुरू होने से खुश थे कि चलो कभी-कभी गुरुद्वारे बस से जाया करेंगे। एक रोज परिवार के साथ बस स्टैंड पहुंचे, लेकिन उनकी खुशी उस वक्त गायब हो गई, जब एक घंटा बस स्टैंड पर खड़े रहने के बावजूद 957 नंबर की कोई भी लो-फ्लोर बस स्टैंड पर नहीं रुकी। जब एक बस स्टैंड से आगे जाकर रेडलाइट पर रुकी तो वह गाड़ियों के बीच से होकर कंडक्टर महोदय की खिड़की तक पहुंचे। बार-बार नॉक करने पर भी कंडक्टर महोदय ने खिड़की नहीं खोली। थक-हारकर गुरनाम सिंह अपनी गाड़ी से गुरुद्वारे पहुंचे। गुरनाम सिंह के साथ जो हुआ, वह किसी के भी साथ हो सकता है।


अगर बस में ड्राइवर या कंडक्टर गलत व्यवहार करें, बस गंदी हो, अंदर की लाइटें काम न कर रही हों, बस स्टॉप पर न रुके या कोई और परेशानी हो, तो शिकायत जरूर करें, लेकिन इसके लिए आपको अपने अधिकार पता होने चाहिए। 

ये हैं आपके अधिकार
- बस केवल निर्धारित रूट पर ही चलनी चाहिए। रास्ते में पड़ने वाले सभी बस स्टॉप पर इंतजार कर रहे लोगों को बस में चढ़ाने की जिम्मेदारी ड्राइवर-कंडक्टर की है।
- बस कंडक्टर और ड्राइवर का यूनिफॉर्म में होना जरूरी है। नेम प्लेट भी स्पष्ट रूप से डिस्प्ले होनी चाहिए।
- बस अपने रूट के सभी स्टॉप पर रुके, यह सुनिश्चित करना स्टाफ की जिम्मेदारी है।
- बसों में फर्स्ट-एड बॉक्स होना अनिवार्य है।
- कंडक्टर के लिए यह जरूरी है कि वह बस के आगे वाले गेट से टिकट बांटना शुरू करे। किसी भी स्टॉप पर वह यात्री को तभी उतरने देगा, जब यह सुनिश्चित हो जाएगा कि वह टिकट ले चुका है।
- अगर कोई यात्री किराया देने से इनकार करता है तो कंडक्टर उसे अगले बस स्टॉप पर उतार देगा।
- आने वाले बस स्टॉप पर पहुंचने से पहले कंडक्टर को उसके नाम की घोषणा करनी चाहिए।
- कंडक्टर बस में यात्रा कर रही किसी भी सवारी पर शंका होने पर उसका टिकट/पास चेक कर सकता है।
- चेकिंग स्टाफ टिकट चेक करने के नाम पर बस को रोककर नहीं रख सकते। एक स्टॉप पर टिकट चेक करने वाले बस में चढ़ेंगे और बस चल देगी। इसके बाद वे चलती बस में ही सवारियों के टिकट चेक करेंगे और आगे वाले किसी स्टॉप पर उतर जाएंगे। केवल उतरने वाली सवारियों के टिकटों की जांच के दौरान ही बस रुकती है।
- बस और सीटें साफ होनी चाहिए, बस के अंदर की लाइटें ठीक होनी चाहिए और रूट की जानकारी डिस्प्ले होनी चाहिए।
- बस में चढ़ने व उतरने वाले सीनियर सिटिजन और बच्चों की मदद के लिए स्टाफ वचनबद्ध है।
- बस अगर बीच रास्ते में खराब हो जाती है तो कंडक्टर की यह जिम्मेदारी है कि वह सवारियों को उसी रूट की दूसरी बस में चढ़ाए।
- बसों में स्मोकिंग बैन है। यह नियम सवारियों के साथ-साथ बस स्टाफ पर भी लागू होता है।
- डिपो से अंतिम डेस्टिनेशन तक और फिर डिपो तक वापस आते समय रास्ते में मिलने वाली सवारियों को बस में यात्रा करने का अधिकार है। अगर डिपो जाने के नाम पर स्टाफ आपको बस में बैठाने से मना करता है तो शिकायत जरूर करें।
- बिना टिकट यात्रा करने वाले शख्स पर 200 रुपये जुर्माना लगाया जा सकता है।
- हर बस में शिकायत और सुझाव पुस्तिका होती है। सवारी के मांगने पर कंडक्टर उसे देने के लिए बाध्य है।
- बस का टिकट संभालकर रखें क्योंकि अगर आप डीटीसी में बस की शिकायत दर्ज कराते हैं तो आपके पास बस के रूट नंबर, रजिस्ट्रेशन नंबर के साथ टिकट भी होना चाहिए। टिकट इस बात का सबूत है कि आप उस बस में थे। पुलिस में शिकायत करते वक्त सिर्फ रूट नंबर और रजिस्ट्रेशन नंबर से ही काम चल जाता है।

ये भी जानें
- डीटीसी शादी-विवाह, पार्टी, पिकनिक आदि के लिए बसें उपलब्ध कराती है। इससे संबंधित जानकारी के लिए सिंधिया हाउस के फोन नंबर 011-28844192 पर कॉल कर सकते हैं। दिल्ली से बाहर जाने वाली बसों की जानकारी यहां से ले सकते हैं। बस अड्डा कश्मीरी गेट 011-23865181, 23868836
बस अड्डा सराय काले खां 011-24358092
बस अड्डा आनंद विहार 011-22152431

- विकलांगों, सैनिकों की विधवाओं व आश्रितों, अंतरराष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त खिलाड़ियों, राष्ट्रीय पुरस्कार विजेताओं और स्वतंत्रता सेनानियों को डीटीसी मुफ्त पास जारी करती है।
- बस पास बनवाने के लिए आवेदन फॉर्म डीटीसी की वेबसाइट www.dtc.nic.in से भी डाउनलोड किया जा सकता है।
- पास की निर्धारित राशि के अलावा आपको पहली बार 15 रुपए पहचान पत्र बनवाने के लिए देने होते हैं।
- डीटीसी स्टूडेंट्स, पुनर्वास कॉलोनियों के निवासियों, पुलिस, पत्रकार व सीनियर सिटिजंस को रियायती बस पास जारी करती है।
- 12 साल तक के बच्चों का सभी बसों में आधा किराया लगता है।
- डीटीसी की दिल्ली दर्शन सेवा भी उपलब्ध है। पूछताछ सिंधिया हाउस के फोन 011-28844192 पर की जा सकती है।
- आप किसी भी दिन 40 रुपये का पास बनवाकर सामान्य बस में कहीं भी सफर कर सकते हैं, जबकि एसी बस के पास की कीमत 50 रुपये है।
- डीटीसी की दिल्ली-लाहौर बस सेवा के लिए आप पासपोर्ट व वीजा कागजात के साथ 60 दिन पहले रिजर्वेशन करा सकते हैं। बस चलने से दो घंटे पहले चेक-इन करना जरूरी है। यह बस सुबह 6 बजे आंबेडकर टर्मिनल (दिल्ली गेट) से चलती है। रिजर्वेशन फॉर्म डीटीसी की वेबसाइट www.dtc.nic.in पर दिल्ली-लाहौर बस सर्विस ऑप्शन में उपलब्ध हैं। टर्मिनल के फोन नंबर 011-23318180, 23712228 हैं।


हेल्पलाइन:-
ब्लूलाइन के लिए
- ब्लूलाइन के यात्री 42400400 पर शिकायत कर सकते हैं। इस हेल्पलाइन पर सातों दिन 24 घंटे शिकायत की जा सकती है।
- आप परिवहन विभाग के कंट्रोल रूम नंबर 011-23929168 पर भी शिकायत दर्ज करा सकते हैं।
- इसके अलावा आप उपायुक्त (एंफोर्समेंट) या आयुक्त/ सचिव को 5/9, अंडर हिल रोड, परिवहन विभाग, दिल्ली को लिख सकते हैं। फैक्स : 011-23933069 

डीटीसी के लिए
- डीटीसी के यात्री इन नंबरों पर शिकायत कर सकते हैं :
011-24351587, 24350378, 24351763, 24352745, 9718190098, 9718190047
- आप टोल फ्री नंबर 1800118181 पर भी शिकायत दर्ज करा सकते हैं।
- dtc@bol.net.in पर भी शिकायत की जा सकती है।
- आप डीटीसी के सीएमडी को लिख सकते हैं। पता है : सीएमडी, डीटीसी मुख्यालय, आईपी एस्टेट, नई दिल्ली-110002, फैक्स : 011-23370877

- अगर विभाग की कार्रवाई से संतुष्ट नहीं हैं तो परिवहन मंत्री को भी ब्लूलाइन या डीटीसी से संबंधित शिकायत भेज सकते हैं। पता है :
परिवहन मंत्री, दिल्ली सचिवालय, आईपी एस्टेट, नई दिल्ली-110002, फैक्स नंबर है : 011-23392022






ईशान जायसवाल
(सी. ए. और बी.कॉम का छात्र )
"अब हम सब साथ-साथ चलेंगे भारत का विकास करेंगे"

कैसे करें मिट्टी का तेल कि शिकायत

अनीता बिस्वास जब भी राशन की दुकान पर राशन लेने जाती हैं तो हर बार उन्हें 'नहीं है' या 'खत्म हो गया' सुनना पड़ता है। कभी गेहूं नहीं तो कभी चावल नहीं, कभी चीनी नहीं तो कभी कुछ भी नहीं... इस तरह की बातें सुन-सुनकर अनीता ही नहीं, ज्यादातर राशन कार्डधारक परेशान रहते हैं। लेकिन ये परेशानियां हल हो सकती हैं। यदि आपको वक्त पर राशन न मिले या उसकी सूचना राशन शॉप पर डिस्प्ले न हो, राशन की दुकान वक्त पर न खुले, डीलर बुरा बर्ताव करे, कम तोले, रसीद न दे या राशन की कालाबाजारी करे तो शिकायत जरूर करें।

         दिल्ली के 70 राशन सर्कल ऑफिसरों को 9 जोन में बांटा गया है। हर सर्कल ऑफिस का इंचार्ज फूड सप्लाई ऑफिसर (एफएसओ) होता है। दिल्ली में चार तरह के राशन-कार्ड हैं : एपीएल (गरीबी रेखा से ऊपर), बीपीएल (गरीबी रेखा से नीचे), अंत्योदय अन्न योजना (एएवाई) व अन्नपूर्णा।

          एपीएल कार्डधारक को गेहूं, चावल व मिट्टी का तेल मिलता है। बीपीएल व अंत्योदय कार्डधारक को चीनी भी मिलती है। एपीएल कार्ड सफेद रंग, बीपीएल कार्ड पीले रंग व एएवाई कार्ड गुलाबी रंग का होता है। जिस परिवार की सालाना आमदनी 24,200 रुपये से कम है, वह बीपीएल कार्ड की कैटिगरी में आता है। इससे ऊपर की सालाना आमदनी वाला परिवार एपीएल कैटिगरी में आता है। अंतोद्य अन्न योजना में शारीरिक या मानसिक विकलांग, भूमिहीन मजदूर और विधवाएं आती हैं। साथ ही, इनके परिवार की सालाना आय 24,200 रुपये से कम होनी चाहिए।

          अंत्योदय कार्ड पर राशन बीपीएल और बीपीएल पर एपीएल से सस्ता मिलता है। अन्नपूर्णा योजना में 65 साल से ज्यादा उम्र के वे लोग आते हैं, जिनकी कमाई का कोई साधन नहीं होता। साथ ही, वे नैशनल ओल्ड एज पेंशन या राज्य पेंशन स्कीम का लाभ न ले रहे हों। इस योजना के तहत हर महीने 10 किलो अनाज मुफ्त दिया जाता है। फिलहाल एपीएल कैटिगरी में एक लाख रुपये सालाना आमदनी वाले परिवार को ही राशन दिया जा रहा है, इससे ज्यादा वाले को नहीं।

         बीपीएल, अंत्योदय अन्न योजना व अन्नपूर्णा कार्ड के लिए आवेदन मिलने पर लाभाथिर्यों का चयन उस सर्कल की सलाहकार समिति करती है। क्षेत्र का विधायक इस कमिटी का चेयरमैन होता है, जबकि फूड सप्लाई ऑफिसर व चेयरमैन द्वारा मनोनीत सदस्य इस कमिटी के सदस्य होते हैं।

          कस्टमर की धांधली का जानकारी होने पर कार्ड रिनुअल के टाइम पर रोक सकते हैं। हालांकि चेक करने का कोई जरिया है भी नहीं। डीलर में पहले एक-दो बार चेतावनी, लिगातार शिकायत मिलने पर कैंसल कर सकते हैं।

- धांधली पकड़े जाने पर कैंसल किया जा सकता है।

- डिपार्टमेंट एक्शन लेता है अगर बेईमानी पकड़ी जाती है।

अधिकार

- कोई भी राशन-कार्ड परिवार के मुखिया के नाम से जारी होता है। लेकिन यदि मुखिया परिवार के किसी दूसरे सदस्य को अधिकृत करता है तो उसके नाम पर भी राशन-कार्ड जारी हो सकता है।

- नया राशन-कार्ड बनवाने के लिए दो फोटो जरूरी हैं। एक फोटो फॉर्म पर चिपकाकर उसे गजेटिड ऑफिसर/क्षेत्रीय विधायक, पार्षद या सांसद से सत्यापित कराना होता है।

- इसके अलावा एक एफिडेविट देना होता है, जिसे क्षेत्र के एसडीएम, पब्लिक नोटरी या ओथ कमिश्नर से सत्यापित कराना होता है।

- साथ ही रेजिडेंस सटिर्फिकेट भी जरूरी है। इसके लिए आप वोटर आई-डी कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, रोजगार पहचान-पत्र, बिजली या पानी का बिल, बैंक पासबुक आदि की कॉपी जमा करा सकते हैं। इसके अलावा, अगर आप प्रॉपटीर् या घर के मालिक हैं तो उसके कागजात की कॉपी, हाउस टैक्स की रसीद आदि जमा कर सकते हैं।

- यदि आप किराएदार हैं और आपका मकान-मालिक आपको कार्ड बनवाने की लिखित इजाजत न दे या किराए की रसीद न हो तो आप अपने दो पड़ोसियों से आवेदन-पत्र पर साइन कराकर उनके राशन-कार्ड की फोटो कॉपी भी लगा सकते हैं।

- यदि आपका सरेंडर सटिर्फिकेट गुम हो गया हो तो आप उस क्षेत्र के एसडीएम, ओथ कमिश्नर या नोटरी पब्लिक द्वारा सत्यापित एफिडेविट भी जमा कर सकते हैं।

- एक ही मकान में रहने वाले दो परिवारों को अलग राशन-कार्ड जारी किया जा सकता है, बशतेर् उनकी रसोई अलग-अलग हो।

यदि आपका राशन-कार्ड गुम हो जाए तो आपको पुलिस एफआईआर के साथ एफिडेविट जमा करना होगा।

- राशन-कार्ड में नाम जुड़वाने के लिए बर्थ सटिर्फिकेट जरूरी है। लेकिन यदि आप कहीं और से आए हैं तो उस सर्कल ऑफिस से अपना नाम कैंसल कराकर उसका सटिर्फिकेट जमा कराना होगा।

- यदि आप राशन-कार्ड से कोई नाम कटवाना चाहते हैं तो उसकी वजह बतलाते हुए आपको आवेदन करना होगा। किसी की मौत होने पर डेथ सटिर्फिकेट जरूरी है।

- यदि आप नाम बदल लेते हैं और राशन-कार्ड में भी वही नाम चाहते हैं तो इसके लिए अखबार में दिए गए विज्ञापन की कॉपी के साथ प्रथम श्रेणी मैजिस्ट्रेट द्वारा जारी एफिडेविट जमा करना होगा।
- यदि आपने उसी सर्कल में मकान बदला है तो पते के प्रूफ की कॉपी फॉर्म के साथ जमा करें। यदि दूसरे सर्कल में मकान बदला है तो अपने सर्कल में फॉर्म जमाकर सर्टिफिकेट लेकर दूसरे सर्कल में एड्रेस-प्रूफ के साथ जमा करें।

विभाग ने विभिन्न कामों के लिए निम्न समयसीमा तय की है। यदि आपका काम इस समयसीमा न हो तो आप इन अधिकारियों से संपर्क कर सकते हैं :

संख्याकार्ड समयसीमा उपयुक्त अधिकारीउच्च अधिकारी

1. नया राशन कार्ड जारी करना 45 दिन सहायक आयुक्त आयुक्त

2. कार्ड की वापसी (सरेंडर)उसी दिन एफएसओ जोनल सहायक आयुक्त

3. किसी सदस्य का नाम कटवाना 10 दिन एफएसओजोनल सहायक आयुक्त

4. कार्ड में किसी का नाम जुड़वाना 10 दिन एफएसओजोनल सहायक आयुक्त

5. उसी सर्कल में एड्रेस में तब्दीली 10 दिन एफएसओजोनल सहायक आयुक्त

6. राशन दुकान या तेल डिपो में10 दिन एफएसओ जोनल सहायक आयुक्त

परिवर्तन कराना (उसी सर्कल में) 

कार्डधारक ध्यान रखें
- अपने राशन-कार्ड को किसी दूसरे को ना दें, न ही राशन डीलर के पास छोड़ें।

- राशन लेते वक्त हमेशा चीज की क्वॉलिटी व मात्रा/वजन जांच लें। यह भी ध्यान रखें कि जो एंट्री आपकी रसीद पर हो, वही आपके राशन-कार्ड में भी हो।

- यदि आपका कार्ड गुम हो जाए, खराब हो जाए या उसमें किसी तरह का बदलाव कराना हो तो हमेशा अपने सर्कल ऑफिस से संपर्क करें। आपको उसमें किसी भी तरह की छेड़छाड़ या ओवरराइटिंग नहीं करनी चाहिए।

- यदि आप रसोई गैस का इस्तेमाल कर रहे हैं तो अपने सर्कल ऑफिस को सूचित करें। रसोई गैस कंस्यूमर मिट्टी का तेल नहीं ले सकते।

- यदि किसी बीपीएल या एएवाई कार्डधारक के परिवार की सालाना आमदनी 24,200 रुपये से ज्यादा हो जाती है तो उसे अपना राशन-कार्ड सरेंडर कर एपीएल कार्ड ले लेना चाहिए।

- यदि परिवार के किसी सदस्य की मौत हो जाए या परिवार का कोई सदस्य तीन महीने से अधिक समय तक दिल्ली से बाहर रहे तो इसकी जानकारी विभाग को देकर उस सदस्य का नाम कार्ड से हटवाएं।

- कार्ड खो जाए तो नया कार्ड बनवाने के लिए एफआईआर की कॉपी के साथ एफिडेविट देना होगा।

- कार्ड में गलत जानकारी सामने आने पर नवीकरण के वक्त दिक्कत आ सकती है।

कहां करें शिकायत
- यदि आपको राशन शॉप से कोई भी शिकायत है तो आप शॉप पर उपलब्ध कंप्लेंट बुक में शिकायत दर्ज करा सकते हैं। एक-दो बार चेतावनी के बाद लगातार शिकायत मिलने पर लाइसेंस कैंसल भी किया जा सकता है।

- यदि दुकानदार इसे उपलब्ध न कराएं तो आप खाद्य आपूतिर् अधिकारी को लिखित में सूचित करें। इसके अलावा आप कंट्रोल रूम के फोन नं. 011-23370841 या 1800110841 पर अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं। आप विभाग की ईमेल आईडी : cfood@hule.nic.in पर भी शिकायत कर सकते हैं।

- आप अपने सर्कल के सहायक आयुक्त को विकास भवन के पते पर भी लिख सकते हैं। पता है : आयुक्त, खाद्य एवं आपूर्ति विभाग, के-ब्लॉक, विकास भवन, आई.पी. एस्टेट नई दिल्ली-110002, फोन नं. 011-23379206 पर फैक्स भी कर सकते हैं। आप खाद्य एवं आपूर्ति मंत्री, दिल्ली सचिवालय, आई.पी. एस्टेट, नई दिल्ली-110002 को भी लिख सकते हैं।

रियलिटी चेक
पब्लिक डिस्ट्रिब्यूशन सिस्टम के नाम पर गोरखधंधा जारी है। न तो सरकार राशन-कार्ड के हिसाब से सप्लाई देती है, न ही राशन-कार्ड के लिए आवेदन करने वाले की ढंग से पड़ताल होती है। ज्यादातर कंस्यूमरों के पास रसोई गैस है, फिर भी मिट्टी का तेल ले रहे हैं। विभाग की हालत यह है कि आवेदन के साथ जमा किए जाने वाले एफिडेविट की जांच-पड़ताल भी नहीं की जाती। राशन डीलरों को आज भी 25-30 पैसे प्रति किलो के हिसाब से कमिशन दिया जाता है। यदि ईमानदारी से होनेवाली उनकी कुल आमदनी देखी जाए तो दुकान का किराया भी नहीं निकलता है। ऐसे में दाल काली नहीं होगी तो क्या होगा!





ईशान जायसवाल
(सी. ए. और बी.कॉम का छात्र )
"अब हम सब साथ-साथ चलेंगे भारत का विकास करेंगे"

माप-तौल में धोखा हो तो यहाँ शिकायत करें

ललित शर्मा ने एक नामी दुकान से एक किलो मिठाई खरीदी। डिब्बे में खाली जगह देखकर उन्हें शक हुआ। दोबारा वजन कराने पर पता चला कि दुकानदार मिठाई के साथ डिब्बा भी तौल रहा है। जब शर्मा जी ने ऐतराज किया, तो दुकानदार ने समझाया कि डिब्बे का वजन मशीन में अजस्ट किया हुआ है। शर्मा जी ने घर आकर वजन किया तो मिठाई का वजन 850 ग्राम ही निकला। 

           शर्मा जी ही क्या, ऐसा किसी के भी साथ हो सकता है। कई बार हमें पता ही नहीं चलता कि अपने पैसे के बदले हमें पूरी मात्रा/वजन मिल भी रहा है या नहीं। जरूरी नहीं कि आप दुकानदार के कांटे पर जो वजन देख रहे हैं, वह सही ही हो। इसी तरह हो सकता है कि आप ऑटो-टैक्सी के मीटर से भी संतुष्ट न हों या फिर आपके घर में जो रसोई गैस सिलिंडर डिलिवर हो रहा है, उसका वजन भी कम हो सकता है। अगर आपको ऐसी समस्याओं से दो-चार होना पड़ता है तो उसकी शिकायत जरूर करें:

जानें अधिकार :-
- दी गई कीमत के बदले ग्राहक को सही मात्रा/वजन मिले, यह तय करना राज्य के माप-तौल विभाग की जिम्मेदारी है।

-माप-तौल विभाग का काम है कि वह इस्तेमाल किए जा रहे उपकरणों की नियमित रूप से जांच करे और जो शख्स कम नाप या तौल रहा है, उसके खिलाफ मामला दर्ज कर कार्रवाई करे।

- कम तौलने या नापने वाले शख्स को जुर्माने के साथ-साथ सजा भी हो सकती है।

- छपी हुई कीमत से ज्यादा चार्ज करना दंडनीय अपराध है।

- किसी भी चीज के अधिकतम मूल्य (छपे हुए) पर अगर व्यापारी नए मूल्य का स्टिकर लगाता है, तो यह गैरकानूनी है।

- सामान की पैकिंग करने वाले व्यापारी को खुद को राज्य के माप-तौल विभाग में रजिस्टर्ड कराना जरूरी है, पैकिंग भले ही बोतल में की गई हो, टिन में की गई हो या फिर रैपर में।

- रेस्ट्रॉन्ट या होटेल से पैक कराई गई खाने-पीने की वस्तुओं पर यह नियम लागू नहीं होता।

- किसी भी पैक्ड सामान को खरीदने से पहले यह सुनिश्चित कर लें कि उस पर उत्पादक/पैक करने वाले/आयात करने वाले का नाम व पता, उस चीज का नाम, उसका वजन, उत्पादन या आयात का महीना व साल लिखा हो। ऐसा न होने पर शिकायत जरूर करें।

- खाने-पीने के सामान पर एक्स्पायरी डेट का भी होना जरूरी है।

- मिठाई के साथ डिब्बे का वजन नहीं तौला जाता है। दुकानदार वजन अजस्ट करने की बात कहता है तो वह भी गलत है। इस तरह की अडजस्टमेंट नहीं होती। अगर कोई ऐसा करता है तो शिकायत जरूर करें।

- पेट्रोल पंप पर पेट्रोल, डीजल या दूसरी चीजों की सही मात्रा मिले, यह तय करना भी राज्य सरकार के माप-तौल विभाग की जिम्मेदारी है। अगर आपका शक सही निकलता है तो डीलर को छह महीने की सजा हो सकती है।

- पेट्रोल पंप पर पेट्रोल-डीजल की मात्रा चेक करने के लिए पांच लीटर का जार उपलब्ध होता है। इस पर माप-तौल विभाग की सील व उसकी अवधि जरूर चेक कर लें।

- ऑटो-टैक्सी के मीटर तेज चलें, तो शिकायत जरूर करें।

- व्यापारी द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे माप-तौल उपकरण (तराजू आदि) सही हैं या नहीं, यह परखने के लिए उपकरण पर लगी माप-तौल विभाग की सील (मुहर) चेक कर सकते हैं। इस सील पर जारी करने वाले इंस्पेक्टर का कोड, आईडी नंबर व वेरिफिकेशन का साल लिखा होता है। वैसे, माप-तौप उपकरणों पर लगी सील की जांच करने पर हमने पाया कि उस पर कुछ भी साफ नहीं है। जारी करने वाले इंस्पेक्टर का कोड/आईडी नंबर आदि कुछ भी पढ़ने लायक स्थिति में नहीं है। विभाग द्वारा जारी वेरिफिकेशन सर्टिफिकेट को व्यापारियों ने डिस्प्ले नहीं कर रखा है, जबकि यह कानूनन अनिवार्य है।

- अगर आपको फिर भी संदेह है तो व्यापारी से विभाग द्वारा जारी सर्टिफिकेट दिखाने को भी कह सकते हैं। अगर वह ऐसा न करे तो उसकी शिकायत करें।

- विभाग द्वारा जारी किए गए सर्टिफिकेट को डिस्प्ले करना व्यापारियों के लिए जरूरी है।

- लोहे के बाट व काउंटर मशीन के लिए दो साल में व इलेक्ट्रॉनिक मशीन के लिए हर साल विभाग से लाइसेंस रिन्यू कराना जरूरी है।

- अगर आप व्यापारी हैं और आपके माप-तौल उपकरण की अवधि जनवरी में खत्म हो रही है तो आप जनवरी से मार्च के बीच कभी भी बिना पेनल्टी अपने उपकरणों का वेरिफिकेशन करा सकते हैं। विभाग ने साल को चार हिस्सों में बांटा है - जनवरी से मार्च, अप्रैल से जून, जुलाई से सितंबर और अक्टूबर से दिसंबर।
- घर पर वजन मापने वाली मशीन रखें। इससे आप गैस सिलिंडर व रद्दी आदि का वजन कर सकते हैं।

हेल्पलाइन :-

- कोई भी ग्राहक या गैर-सरकारी संगठन कम वजन तौलने या नापने की लिखित शिकायत स्टैंर्डड्स ऑफ वेट्स ऐंड मेजर्स (एनफोर्समेंट) ऐक्ट 1985 के तहत मेट्रोपॉलिटन मैजिस्ट्रेट, कड़कड़डूमा, शाहदरा को कर सकता है।

- आप कंट्रोलर, माप-तौल विभाग को फोन, फैक्स, लिखित या मेल से अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं। आमतौर पर विभाग 15 दिन के अंदर बताता है कि आपकी शिकायत पर क्या कार्रवाई हुई। शिकायत करने के लिए पता है : कंट्रोलर, माप-तौल विभाग, दिल्ली सरकार, के ब्लॉक, विकास भवन, आई. पी. एस्टेट, नई दिल्ली-110002, फोन : 011-23379266, फैक्स : 011-23379267, मेल : cwmd@hub.nic.in

- अगर आपकी शिकायत पर कोई कार्रवाई न हो, तो आप सेक्रेटरी/कमिश्नर (फूड ऐंड सप्लाई) को उपरोक्त पते पर लिख सकते हैं। फोन : 011-23378759, फैक्स : 011-23379206

- आप फूड ऐंड सप्लाई मिनिस्टर, दिल्ली सरकार को भी लिख सकते हैं। पता है : फूड ऐंड सप्लाई मिनिस्टर, दिल्ली सचिवालय, आई. पी. एस्टेट, नई दिल्ली-110002, फोन : 011-23392126/27






ईशान जायसवाल
(सी. ए. और बी.कॉम का छात्र )
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कटे-फटे नोट बदलने की शिकायत

दीपक वर्मा को पिछले दिनों सिक्कों (रेजगारी) की जरूरत पड़ी, जिसके लिए वह बैंक गए। कैशियर को जरूरत बताई तो उसने इनकार कर दिया। बैंक मैनेजर से मिले, तो उसने कहा कि उन्हें सिक्कों का पूरा बैग लेना पड़ेगा। इसके बाद वर्मा जी को कहा गया कि वह हफ्ते भर बाद बैंक आकर सिक्कों का बैग ले जाएं। बताए गए समय पर वर्मा जी फिर बैंक पहुंचे, लेकिन सिक्कों का बैग नहीं मिला। इसके बाद भी उन्होंने बैंक के कई चक्कर लगाए, लेकिन हर बार उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ा।

वर्मा जी के साथ जो हुआ, वह किसी के भी साथ हो सकता है। बैंक सिक्के उपलब्ध न कराएं या फटे-पुराने नोट बदलने से इनकार करें, तो आपको इसकी शिकायत करनी चाहिए, लेकिन इसके लिए आपको अपने अधिकारों के बारे में जानकारी होना जरूरी है। नीचे दिए गए सभी नियम सरकारी, गैर-सरकारी, प्राइवेट व सहकारी बैंकों पर लागू होते हैं।

ये हैं आपके अधिकार

- सभी बैंकों में 'यहां दोषपूर्ण नोट बदले व स्वीकार किए जाते हैं' साफ शब्दों में आसानी से दिखाई देने वाली जगह पर डिस्प्ले होना चाहिए।

- वैसे तो सभी बैंक नोट व सिक्के एक्सचेंज करते हैं, लेकिन इनकी कुछ शाखाएं इस काम के लिए खासतौर से तय की गई हैं। इन शाखाओं की जानकारी www.rbi.org.in पर उपलब्ध है। आप अपने बैंक से भी संबंधित शाखा की जानकारी ले सकते हैं।

- एक, दो व पांच रुपये के नोट सिंगल नंबर नोट कहलाते हैं। ऐसे नोट बैंक से बदलते समय नोट के दो से ज्यादा टुकड़े नहीं होने चाहिए। नोट की कोई भी अनिवार्य विशेषता पूरी तरह गायब न हो और नोट के नंबर के सभी अंक किसी एक टुकड़े (हिस्से) पर मौजूद हों। अगर आपका नोट इन शर्तों पर खरा उतरता है, तो किसी भी बैंक की किसी भी शाखा पर आप उसे बदल सकते हैं।

- 10 रुपये या उससे ज्यादा के नोट डबल नंबर नोट कहलाते हैं। यानी नोट पर मौजूद नंबर दो जगहों पर होता है। नोट के दो से ज्यादा टुकड़े न हों और दोनों टुकड़ों पर एक नंबर हो, तो ऐसे नोट को किसी भी बैंक की किसी भी शाखा पर बदला या जमा कराया जा सकता है।

- नोट को उसी कीमत पर बदला जाता है, जितने का वह है।

- ऐसे नोट जिनका एक हिस्सा गायब हो या जिनके टुकड़ों को चिपकाकर पूरा नोट बनाया गया हो, विरूपित नोट कहलाते हैं। ऐसे नोट बैंकों की चुनी हुई शाखाओं या रिजर्व बैंक के रीजनल ऑफिसों से बदले जा सकते हैं।

- जो नोट बेहद खस्ताहाल हों, बुरी तरह जल गए हों, टुकड़े-टुकड़े हो गए हों या आपस में बुरी तरह चिपक गए हों, उन्हें बैंक ब्रांच से बदलने के लिए न कहें। ऐसे नोटों को बदलने के लिए रिजर्व बैंक जाना होगा, जहां इन्हें एक खास प्रक्रिया के तहत बदला जाता है।

- अगर आप अपने खाते में सिक्के जमा करना चाहते हैं या सिक्कों के बदले नोट चाहते हैं तो बैंक ऐसा करने के लिए बाध्य हैं।

- अगर आप छोटे नोट या सिक्के जमा करना चाहते हैं तो बैंक इनकार नहीं कर सकता।

- आप किसी भी रकम के सिक्के बैंक को दे सकते हैं, चाहे वे पांच पैसे के सिक्के ही क्यों न हों।

- सिक्कों की संख्या ज्यादा है तो अलग-अलग मूल्य वर्ग के सिक्कों को अलग-अलग रखें। बैंक इन्हें तौलकर या फिर सिक्के गिनने वाली मशीन से गिनकर स्वीकार करेगा।

- रिजर्व बैंक समय-समय पर सभी बैंकों के अधिकारियों को खराब नोटों की वापसी की ट्रेनिंग देता है, ताकि वे पूरे कॉन्फिडेंस के साथ जनता की मदद कर सकें।

- अगर आप नोटों या सिक्कों को लेकर रिजर्व बैंक जा रहे हैं तो अपनी आईडी साथ में रखें। इसके बिना आप वहां नहीं घुस पाएंगे।

- अगर बैंक सिक्के लेने या नोट बदलने से इनकार करे तो आप ब्रांच मैनेजर के पास मौजूद कंप्लेंट बुक में शिकायत दर्ज कर सकते हैं।

- सभी बैंकों के रीजनल मैनेजरों की यह ड्यूटी है कि वे अपने बैंकों का अचानक दौरा करें और यह सुनिश्चित कराएं कि आरबीआई के आदेशों का पालन हो रहा है।

- अगर आपको नोटों के एक्सचेंज को लेकर किसी तरह का स्पष्टीकरण चाहिए, तो आप इस पते पर लिख सकते हैं: मुख्य महाप्रबंधक, मुद्रा प्रबंध विभाग, भारतीय रिजर्व बैंक, केंद्रीय कार्यालय, मुंबई-400001

इनसे बचें

- पे, पेड और कैंसल की मुहर लगे नोट कभी न लें। ऐसे नोट बैंक में जाने पर जब्त कर लिए जाएंगे। वैसे, बैंकों को भी निर्देश है कि वे ऐसे नोट लोगों को न दें। ये वे नोट होते हैं, जिन्हें रिजर्व बैंक चलन से बाहर कर देता है।

- अगर किसी नोट के एक सिरे से दूसरे सिरे तक कोई नारा या राजनीतिक संदेश लिखा हो तो वह मान्य नहीं रह जाता, इसलिए नोट पर कभी कुछ न लिखें। नोट पर मुहर लगाना या कोई साइन बनाना भी गलत है। बैंक का स्टाफ भी अगर ऐसा करता है तो गलत है।

- नोट का कोई हिस्सा गायब हो तो किसी दूसरे नोट का हिस्सा चिपकाकर उसे पूरा करने की कोशिश न करें। आपका नोट जैसा भी है, उसी हालत में रिजर्व बैंक को दें।

- नोटों में पिन आदि न लगाएं।

- नोटों को शादी-विवाह में हार के तौर पर इस्तेमाल करना गलत है।

हेल्पलाइन

- अगर बैंक नोट न बदले, सिक्के लेने या देने से इनकार करे, नए नोट न उपलब्ध कराए, तो बैंक में मौजूद कंप्लेंट बुक में शिकायत दर्ज करें। शिकायत लिखित रूप में भी ब्रांच मैनेजर को दी जा सकती है।

- अगर आपकी शिकायत पर एक महीने तक कोई कार्रवाई न हो तो आप बैंक के हेड ऑफिस के पते पर चीफ जनरल मैनेजर को भी लिख सकते हैं।

- आप बैंकिंग ओम्बड्समैन को भी लिख सकते हैं। ओम्बड्समैन को लिखते समय अपनी शिकायत के साथ पहले किए गए पत्र-व्यवहार की सभी प्रतियां जरूर लगाएं। पता है: बैंकिंग ओम्बड्समैन, दूसरी मंजिल, रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया, 6, संसद मार्ग, नई दिल्ली-110001 www.bankingombudsman.rbi.org.in पर सभी बैंकों की शिकायत की जा सकती है।

रियलिटी चेक

ज्यादातर बैंक अपना काम कम करने के लिए जनता को टरकाते रहते हैं। बार-बार चक्कर लगाने पर भी सिक्के या नए नोट उपलब्ध नहीं होते, जबकि ये ही सुविधाएं कुछ खास लोगों को आसानी से मुहैया करा दी जाती हैं। रिजर्व बैंक के काउंटरों पर हर रोज वही चेहरे लाइन में नजर आते हैं। यहां के कायदे-कानून की जानकारी भी यहीं पहुंचकर मिलती है कि आप सिर्फ पांच नोट ही बदल सकते हैं या फिर इतने नए नोट ही आपको मिलेंगे, पूरा पैकेट नहीं।


ईशान जायसवाल
(सी. ए. और बी.कॉम का छात्र )
"अब हम सब साथ-साथ चलेंगे भारत का विकास करेंगे"